(1)
हँसी-खुशी मजे से 58 साल बित गए हैं
और दो साल लिखते-पढ़ते और भाषण देते बित जाएंगे
58 साल में हट के जीने की कोशिश की है हमने
कहूँगा खुद को कामियाब हूँ मैं और सचमुच जिंदा हूँ मैं ।

(2)
उम्र ढलता या बढ़ता है
खुद को ही तय करना पड़ता है
हम उम्रवाले मुझ से भी
ज्यादा बूढ़े क्यों लगते हैं ?

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(3)
रिटायरमेंट के बाद
एक दफ्तर खोलुंगा घर में
मेरे सपने मेरे साथ काम करेंगे
मैं कभी भी अकेला महसूस नहीं करूंगा घर में ।

(4)
अकेले ही बहुत कुछ किया है हमने
ये हिम्मत साथ देगा मरते दम तक
कोई किसी का नहीं होता
ये जान लिया हूँ  कान और दिमाग खोल के ।

(5)
घरवालों के मदद के बिना
ये सफर शुरू ही नहीं हो पाता
तहे दिल से शुक्रिया आदा करता हूँ
भाई-बहन, बिबि और मेरे माता-पिता ।

 …रतिकान्त सिंह.

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