जो मुझे दिखाई देती और सुनाई देती…(7)

(1)
(औरत)
जो समाज औरत को मान-सम्मान नहीं दे सकता
उस समाज की उन्नति ठप है
यह हम अकेले नहीं सारा संसार कहता है
सच – इस समाज को गढ़ने में औरत की भूमिका काफी अहम है । 

(2)
(औरत)
औरत स्नेहमयी, प्रेममयी, शान्त और सरल होती है
पर दुर्गा बनकर संहार भी करती है
इतना दम-खम और हिम्मत औरत में है
इसका हम आदर सम्मान जरूर करते हैं । 

(3)
(औरत)
औरत को माँ, बहन और देवी के रूप में देखते हैं
उनके बारे में बुरा बात करने को डरते हैं
पर – जब औरत, झूठी, बेशरम और अहंकारी बन जाए
लोगों को बदनाम तथा झूठी आरोप लगाए
सोच-समझ के बताएं और हमारे ज्ञान बढाएं
ऐसी औरत को क्या मनमानी करने दिया जाए ?
ऐसी औरत को क्या कुछ ना कहा जाए?

(4)
(औरत)
खुद झूठ बोलके, झूठ के सहारे
औरों को झूठ साबित करना
किस मानवता की रीत है !
ऐसा काम चाहे मर्द करे या औरत
सच-मुच वह संस्था तथा समाज के लिए है घातक
ऐसा करने वाले को कभी भी बढ़ावा नहीं देना चाहिए
लेकिन – देना चाहिए भद्र और शालीन बनने का सबक । 

(5)
(औरत)
एक आदमी ने बताया…
खतरनाक, बदमाश, घमंडी और फरेब औरत भी होते हैं
यह सबको पता नहीं, क्योंकि उन्होने ऐसी औरत शायद देखी ही नहीं है
कृपया ध्यान दें…
ऐसी औरत से बचके रहिए, सावधान रहिए
हो सके तो ऐसी औरत को अपने आसपास भटकने ना दीजिये ।

…रतिकान्त सिंह