“Still I Rise” is a famous poem by Maya Angelou. This is a hindi poem translation done by me to make it more popular among hindi knowing people who love poem. For more such powm translations please check-out my previous post on the poem “Daffodils” by Wordsworth.

फिर भी मैं उठूँगी
Maya Angelou – 1928-2014

माया अञ्जेलो – 1928-2014

Maya Angelou

Angelou reciting her poem "On the Pulse of Morning" at US President Bill Clinton's inauguration, January 20, 1993

Angelou reciting her poem “On the Pulse of Morning” at US President Bill Clinton’s inauguration, January 20, 1993

Born Marguerite Annie Johnson
April 4, 1928
St. LouisMissouri, U.S.
Died May 28, 2014 (aged 86)
Winston-Salem, North Carolina, U.S.
Occupation
  • Writer
  • poet
  • civil rights activist
Period 1951–2014
Subject
  • Memoir
  • poetry
Notable works
Spouses
  • Tosh Angelos
    (m. 1951; div. 1954)
  • Paul du Feu
    (m. 1974; div. 1983)
Children 1

Source : Wikipedia

 

 

फिर भी मैं उठूँगी

मुझे इतिहास से नीचे गिरा दे सकते
तुम्हारा कड़वे/कटु, विकृत मिथ्या द्वारा,
तुम मुझे कुचल दे सकते उसी धूल में
किन्तु फिर भी, धूल जैसा, मैं ऊपर उठूँगी ।

क्या मेरे नट खट/ज़िंदा दिल तुम्हें परेशान करता है ?
क्यों तुम्हें दुख आक्रांत कर रखा है
कारण मैं ठाठ से चलती हूँ जैसे मेरा तेल का कुआँ
पिचकारी जैसा बैठकखाना से निकलता है।

ठीक चन्द्र और सूर्य जैसा,
ज्वार –भाटा के निश्चितता के साथ,
ठीक जैसे आशाएँ लंबी छलांग मारता है,
फिर भी मैं उठूँगी।

 

क्या तुम मुझे टूटा हुआ निराश देखना चाहते हो

नतमस्तक और झुकी हुई आँखें ?
काँधें झुके जा रहे हैं जैसे आँखों से अश्रु गिर रहा है,
मेरी भावपूर्ण क्रंदन से कमजोर हो चुका हूँ ?

 

क्या मेरा गुरूर/अकड़ तुम्हें बुरा लगता है ?
क्या तुम इसे एक भद्दे तरीके से सह लेते हो
कारण मैं हँसती हूँ मस्ती में रहती हूँ जैसे मैंने सोने का खान पाया है
खोदा है मेरी खुद की घर की पिछवाड़े में ।

 

तुम तुम्हारे शब्द की वाणों से मुझे मार सकते हो,
तुम तुम्हारे आंखो की बुरी नजर से मुझे काट सकते हो,
तुम तुम्हारे घृणा करने के स्वभाव से मुझे मार दे सकते हो,
किन्तु फिर भी, हवा जैसे, मैं उठूँगी।

 

क्या मेरी कामुकता तुमको परेशान कर देती है ?
क्या यह तुम्हारे लिए आश्यर्यजनक बात है
मैं नाचती हूँ जैसा कि मुझे मिला है हीरा
मेरे दो जांघ/उरु कि मिलनस्थल पे ?

शर्मिंदगी इतिहास के झोपड़ियों से बाहार निकल के
मैं उठूँगी


अतीत जो दुख-दर्द से भरा है उस से

मैं उठूँगी

मैं एक काला समुंदर, लम्बा चौड़ा हो कर उछल कूद कर रही हूँ,
अच्छी तरह से और फुलाव से लहर को मैं सहती हूँ ।

आतंक और डर के रातों को पीछे छोड़ते हुए

मैं उठूँगी

आश्चर्यजनक स्पष्ट प्रभात पे
मैं उठूँगी

लाऊँगी उपहार जो मेरे पूर्वजों ने दिया था,

मैं हूँ सपना और आशा कृतदास लोगों का ।
मैं उठूँगी

मैं उठूँगी

मैं उठूँगी।

*****************

अनुवादक : रतिकान्त सिंह

 

 

Still I Rise

(Original English Poem)

Maya Angelou – 1928-2014

You may write me down in history

With your bitter, twisted lies,

You may trod me in the very dirt

But still, like dust, I’ll rise.

 

Does my sassiness upset you?

Why are you beset with gloom?

’Cause I walk like I’ve got oil wells

Pumping in my living room.

 

Just like moons and like suns,

With the certainty of tides,

Just like hopes springing high,

Still I’ll rise.

 

Did you want to see me broken?

Bowed head and lowered eyes?

Shoulders falling down like teardrops,

Weakened by my soulful cries?

 

Does my haughtiness offend you?

Don’t you take it awful hard

’Cause I laugh like I’ve got gold mines

Diggin’ in my own backyard.

 

You may shoot me with your words,

You may cut me with your eyes,

You may kill me with your hatefulness,

But still, like air, I’ll rise.

 

Does my sexiness upset you?

Does it come as a surprise

That I dance like I’ve got diamonds

At the meeting of my thighs?

 

Out of the huts of history’s shame

I rise

Up from a past that’s rooted in pain

I rise

I’m a black ocean, leaping and wide,

Welling and swelling I bear in the tide.

 

Leaving behind nights of terror and fear
I rise

Into a daybreak that’s wondrously clear

I rise

Bringing the gifts that my ancestors gave,
I am the dream and the hope of the slave.
I rise

I rise

I rise.

**********************

Still I Rise

(Line-wise translation)

Maya Angelou – 1928-2014

You may write me down in history

मुझे इतिहास से नीचे गिरा दे सकते
With your bitter, twisted lies,

तुम्हारा कड़वा/कटु, विकृत मिथ्या द्वारा,
You may trod me in the very dirt

तुम मुझे कुचल दे सकते उसी धूल में
But still, like dust, I’ll rise.

किन्तु फिर भी, धूल जैसा, मैं ऊपर उठूँगी ।

Does my sassiness upset you?

क्या मेरे नट खट/ज़िंदा दिल तुम्हें परेशान करता है ?
Why are you beset with gloom?

क्यों तुम्हें दुख आक्रांत कर रखा है
’Cause I walk like I’ve got oil wells

कारण मैं ठाठ से चलती हूँ जैसा मेरा तेल के कुआँ है
Pumping in my living room.

पिचकारी जैसा बैठकखाना से निकलता है।


Just like moons and like suns,

ठीक चन्द्र और सूर्य जैसा,
With the certainty of tides,

ज्वार –भाटा के निश्चितता के साथ,
Just like hopes springing high,

ठीक जैसा आशाएँ लंबी छलान मारता है,
Still I’ll rise.

फिर भी मैं उठूँगी।

Did you want to see me broken?

क्या तुम मुझे टूटा हुआ निराश देखना चाहते हो ?

Bowed head and lowered eyes?

नतमस्तक और झुका हुआ आँखें ?
Shoulders falling down like teardrops,

काँधें झुके जा रहे हैं जैसे आँखों से अश्रु गिर रहा है,
Weakened by my soulful cries?

मेरी भावपूर्ण क्रंदन से कमजोर हो चुका हूँ ?

Does my haughtiness offend you?

क्या मेरा गुरूर/अकड़ तुम्हें बुरा लगता है ?
Don’t you take it awful hard

क्या तुम इसे एक भद्दा तरीके से सह लेते हो
’Cause I laugh like I’ve got gold mines

कारण मैं हँसती हूँ मस्ती में रहती हूँ जैसे मैंने सोने का खान पाई है
Diggin’ in my own backyard.

खोदा है मेरी खुद की घर की पिछवाड़े में ।

You may shoot me with your words,

तुम तुम्हारे शब्द की वाणों से मुझे मार सकते हो,
You may cut me with your eyes,

तुम तुम्हारे आंखो की बुरी नजर से मुझे काट सकते हो,
You may kill me with your hatefulness,

तुम तुम्हारे घृणा करने का स्वभाव से मुझे मार दे सकते हो,
But still, like air, I’ll rise.

किन्तु फिर भी, हावा जैसा, मैं उठूँगी।

Does my sexiness upset you?

क्या मेरा कामुकता तुमको परेशान कर देता है ?
Does it come as a surprise

क्या यह तुम्हारे लिए आश्यर्यजनक बात है
That I dance like I’ve got diamonds

मैं जानता हूँ जैसा कि मुझे मिला है हीरा
At the meeting of my thighs?

मेरे दो जांघ/उरु कि मिलनस्थल पे ?

Out of the huts of history’s shame

शर्मिंदगी इतिहास के झपड़ियों से बाहार निकाल के
I rise

मैं उठूँगी
Up from a past that’s rooted in pain

अतीत जो दुख-दर्द से भरा है उस से

I rise

मैं उठूँगी
I’m a black ocean, leaping and wide,

मैं एक काला समुंदर, लम्बा चौड़ा हो कर उछल कूद कर रही हूँ,
Welling and swelling I bear in the tide.

अच्छी तरह से और फुलाव से लहरको मैं सहता हूँ ।

Leaving behind nights of terror and fear

आतंक और डर के रातों को पीछे छोड़ते हुए
I rise

मैं उठूँगी
Into a daybreak that’s wondrously clear

आश्चर्यजनक स्पष्ट प्रभात पे
I rise

मैं उठूँगी
Bringing the gifts that my ancestors gave,

लाऊँगी उपहार जो मेरे पूर्वजों ने दिया था,
I am the dream and the hope of the slave.

मैं हूँ सपना और आशा कृतदास लोगों का ।
I rise

मैं उठूँगी
I rise

मैं उठूँगी
I rise.

मैं उठूँगी ।

**************

अनुवादक : रतिकान्त सिंह

 

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